Chouboli Rani - 1 in Hindi Detective stories by Salim books and stories PDF | चौबोली रानी - भाग 1

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चौबोली रानी - भाग 1

 

अमावस्या की तिमिर भरी रात्रि में एक सुंदर बलिष्ठ पुरुष उज्जयिनी की वीथिकाओं में घूम रहा था. प्रहरी सजग, निष्ठापूर्वक अपने दायित्व का निर्वाह कर रहे थे. उनकी ध्वनि समय-समय पर नीरवता को भंग कर देती थी.वीथिकाओं में लगातार एक ही ध्वनी गूंज रही थी,"प्रजा सुख से सोये, सम्राट विक्रमादित्य के प्रहरी जाग रहे हैं" पुरुष ऊज्जयिनी की वीथिकाओं में घूमता रहा. सहसा उसे नगर के बाहर समीपवर्ती उद्द्यान में जाने की भावना जागी. वह नगर के प्रवेश द्वार पर पहुंचा. उसे प्रहरी का गंभीर स्वर सुनाई दिया - "कौन है, मध्यरात्रि में निरुद्देश्य क्यों घूम रहा है"
युवक -"मैं नगर के बाहर जाना चाहता हूं"
प्रहरी -"क्या परदेसी है, क्या तुझे ज्ञान नहीं कि उज्जयिनी नगर का प्रवेश द्वार सुर्योदय के पूर्व नहीं खुलता"
पुरुष ने बिना कुछ बोले ही अपना दायां हाथ आगे कर दिया. उसकी अंगुली में पड़ी राजमुद्रीका देखकर प्रहरी कांप उठा.
उसने फिर कहा - "सम्राट विक्रमादित्य की जय" स्वामी!मैं आपको पहचान नहीं पाया. मेरा अपराध क्षमा करें.
सम्राट ने कहा -"प्रहरी, राजकीय नियम सबके लिये समान होते हैं.भयभीत होने की आवश्यकता नहीं"
द्वारपाल ने द्वार खोल दिया. प्रहरी ने अपने आप से कहा-"सम्राट विक्रमादित्य महान है. जब प्रजा सुख की नींद सोती है तब सम्राट जागते है. प्रजा का दुःख दर्द, उसकी समस्या जानने के लिये भेष बदलकर नगर की गलियों में घूमते हैं. दुखी और अभाव-ग्रस्त लोगों के घर में स्वयं जाते है और उनके आभावों को दूर करते है गुप्तचर विभाग की एक शाखा यही कार्य करती है और जनता के कष्टों को सम्राट तक पहुंचाती है. सम्राट महान हैं. ऐसे स्वामी का सेवक होना भी गौरव की बात है."
  सम्राट विक्रमादित्य बगीचे में घूमते रहे. घूमते घूमते एक विशाल आम्र-वृक्ष के नीचे आकर रुके. आम्र वृक्ष पर तोता-मैना बातें कर रहे थे. सम्राट आश्चर्य चकित रह गये, पक्षी भी मनुष्य की भाषा में बात-चीत कर रहे हैं.
 तोते ने कहा-"मध्य रात्रि बीत चुकी है, तुम घोंसले के द्वार से दूर हटों, जिससे कि मैं घोंसले में विश्राम कर सकूँ"
   मैना ने कहा - विश्राम करना है तो कोई अन्य स्थान खोज लो. यदि यहां रहना है तो बच्चों की सुरक्षा और देखभाल करनी पड़ेगी. मै सूर्योदय के साथ ही अपनी भूख मिटाने और बच्चों का दाना चुग्गा लेने जाऊंगी. बच्चे अकेले रहेंगे.सर्प एवं बाज़ पक्षी इन्हें पीड़ा दे सकते हैं, मार भी सकते हैं. यदि बच्चों की देखभाल की हां भरो तो मैं नींड का द्वार छोड़कर तुम्हें प्रवेश की अनुमति दे सकती हूं.
   तोते ने कहा - "हमारी संस्कृति पुरुष प्रधान संस्कृति है. नारी छल का दूसरा नाम है. नारी नर की समानता नहीं कर सकती. बच्चों को पालना नारी का काम है, नर का नहीं."
    मैना ने उत्तर दिया - नारी का त्याग एवं समर्पण जगत में प्रसिद्ध है. व त्याग की प्रतिमूर्ति है. क्या तुम्हें पता नहीं, दमयंती ने राजभवन के वैभव को ठुकरा कर नल के साथ विजन में दुःख उठाये. म्हारानी सीता ने राम के साथ वं में जाने में सौभाग्य माना. मिथ्या लाँछन के कारण निर्वासित जीवन व्यतीत किया किन्तु राम को उन्होंने एक क्षण भी विस्मृत नहीं किया. क्या तुम्हें म्हापुरुषों का व कथन याद नहीं"जहां नारी का निवास होता है, वहाँ देवता बसते हैं. नारी को अर्धागंनी कहा जाता है, नर और नारी एक दूसरे के पूरक हैं.जीवन रूपी रथ के दो पहिये हैं. एक के बिना दूसरे का जीवन नीरस एवं अधूरा है. मात्र नर ही महत्वपूर्ण है यह तुम्हारी मिथ्या मान्यता है. नारी के रूप का आकर्षण अदभुत होता है. क्या तुमने दीपक की लौ पर जलते हुए पतंगो को नहीं देखा ? कौन सा आकर्षण होता है जिसके कारण वे अपने प्राण लुटाते हैं?
मैं तुम्हें रानी लीलावती के संदर्भ में बताती हूं. रानी लीलावती के रूप और सौन्दर्य पर मुग्ध होकर राजा,राजकुमार,वीर, विद्वान,श्रेष्ठी उसकी शर्तो की पूर्ति न करने के कारण कारावास में नारकीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं. वे जानते है कि रानी लीलावती को प्राप्त करना संभव नहीं फिर भी उसे प्राप्त करने की कामना करने वालों का क्रम टूटा नहीं है.जब कि वे जानते हैं रानी लीलावती को प्राप्त करने का प्रयत्न करना जीवन पर्यन्त दुःखो को मोल लेना है.
   तोते ने कहा - प्रिये! क्या तुम सच कह रही हो ? मुझे रानी लीलावती और उसके संदर्भ में विस्तार से बताओ. वैसे मेरे लिये तो तुम लीलावती से अधिक सुंदर हो,पर मैं रानी लीलावती के बारे में सब कुछ जानना चाहता हूं.
    मैना ने कहा - व्यर्थ की प्रशंसा रहने दो, पुरुषों के स्वभाव को मैं भली-भांति जानती हूं.
   तोता बोला - प्रिये! अन्य बातें न कर मुझे रानी लीलावती की कहानी सुनाओ.
मैना बोली - अच्छा तो सुनो.
 
क्रमशः
 
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